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शुरू करो स्वयं से मन को पूरी तरह तज प्रेम में लगा गोता गहरा करो स्वीकार स्वयं को । 2 साक्षी केवल मौन बैठा हुआ देखता हुआ जगत को अमृत बूँदें चाँदनी में आलोकित ।
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