शनिवार, 31 अक्टूबर 2015

अमृत बूँदें

1

शुरू करो
स्वयं से
मन को पूरी तरह तज
प्रेम में लगा
गोता
गहरा
करो
स्वीकार
स्वयं को ।

               2

साक्षी
केवल
मौन
बैठा हुआ
देखता हुआ
जगत को
अमृत बूँदें
चाँदनी में आलोकित ।

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