मंगलवार, 26 जनवरी 2016

सपने

वह
दूर
जो आम का पेड़ है
उसकी फुनगी पर
बसते हैं
सपने
जो
वासंती बयार पा
कोयल की कूक सुन
जीवित हो उठते हैं
लेकिन
तुम तक पहुंचने से पहले ही
ईंट भट्टों का काला धुआं
पेड़ों को लगता है डसने
और
वे सपने
अपने बसेरे की रक्षा करने
रास्ते से ही लौट पड़ते हैं ।।

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