वह
दूर
जो आम का पेड़ है
उसकी फुनगी पर
बसते हैं
सपने
जो
वासंती बयार पा
कोयल की कूक सुन
जीवित हो उठते हैं
लेकिन
तुम तक पहुंचने से पहले ही
ईंट भट्टों का काला धुआं
पेड़ों को लगता है डसने
और
वे सपने
अपने बसेरे की रक्षा करने
रास्ते से ही लौट पड़ते हैं ।।
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