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रविवार, 13 सितंबर 2015

बहता रहा

       बहता रहा
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शाम को,
चाँद चुपचाप झाँका;
आकाश
और नीचे उतर आया ;
वह
शान्त
मधु सा
बहता रहा-
मेरे अंतस में
अविराम ।।
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धैर्य पूर्वक समय देने के लिए आपका आभार।।  स्वागतम् ।।
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An abstract digital creation - Anupam Gupta