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शुक्रवार, 11 सितंबर 2015

।। हूँ ।।

समय दस्तक देता है
समय जीवन बदल देता है
मैं ,  वह समय ही तो हूँ ।

प्रेम दस्तक देता है
प्रेम जीवन बदल देता है
मैं ,  वह प्रेम ही तो  हूँ ।

कवि दस्तक देता है
कवि सारी दुनिया बदल देता है
मैं वह कवि ही तो हूँ ।

आओ,  नये क्षितिज की सृष्टि करें ।
आओ,  समय    के     पार    चलें।।

गुरुवार, 20 अगस्त 2015

आस्मां और भी हैं

तोड़ता
जोड़ता
टुकड़ों टुकड़ों
बंटा
मेरा
मन
पाकर
साथ तुम्हारा
पुनः पुनः
जुड़ जाता है
एक नया आयाम
क्षितिज के पार
आस्मां और भी है