अधर में
खग चहकते
गाती
नदिया धार
प्रतिध्वनित
कितने क्षण
ध्वनियों की
परिधि पार
एक लहर
जन्म लेते ही
देती जन्म
लहरों को
टूटती सीमाएँ
चंचल मन के पार
Thanks for your visit.
And below is an oil painting
by Anupam Gupta
अधर में
खग चहकते
गाती
नदिया धार
प्रतिध्वनित
कितने क्षण
ध्वनियों की
परिधि पार
एक लहर
जन्म लेते ही
देती जन्म
लहरों को
टूटती सीमाएँ
चंचल मन के पार
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अधर में
खग चहकते
गाती
नदिया धार
प्रतिध्वनित
कितने क्षण
ध्वनियों की
परिधि पार
एक लहर
जन्म लेते ही
देती जन्म
लहरों को
टूटती सीमाएँ
चंचल मन के पार
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