अधर में खग चहकते गाती नदिया धार
प्रतिध्वनित कितने क्षण ध्वनियों की परिधि पार
एक लहर जन्म लेते ही देती जन्म लहरों को टूटती सीमाएँ चंचल मन के पार
Thanks for your visit. And below is an oil painting by Anupam Gupta
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