मंगलवार, 15 सितंबर 2015

पार

अधर में
खग चहकते
गाती
नदिया धार

प्रतिध्वनित
कितने क्षण
ध्वनियों की
परिधि पार

एक लहर
जन्म लेते ही
देती जन्म
लहरों को
टूटती सीमाएँ
चंचल मन के पार

Thanks for your visit.
And below is an oil painting
by Anupam Gupta

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