दुर्लभ अपनत्व आंखें मलता जीवन संकल्प कालचक्र लिख रहा नये पृष्ठ पीछे छूटता अन्तिम सत्य ओ यायावर , रहे याद कि दिशाओं को भी खुला आसमान चाहिए ।
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