----------------------------------------------------------------------------..
--------------एक गीतिका ---------------
मित्रों ! होलिका उत्सव की बधाई !!!!
महका मन मन कचनार सखी
पसरी बन-बन गुलनार सखी ॥
""
कुलों में कलरव बतरस सी
छलका मधुरिम सा प्यार सखी ॥
""
रसिया मन बसिया खेल रहो
चनियां रंगती ब्रजनार सखी ॥
""
यमुना जल लेके परात खड़ी
कृष्णा जायें वलिहार सखी ॥
""
झरता सौरभ उर खोल-खोल
वन लहकी जाय बहार सखी ॥
""
उर लाय लईं सुषमा श्यामा
बरसी है रंगन फुहार सखी ॥
""
कल्पना मनोरमा
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें