पवित्रता की तलाश में
समय की गर्द से बचे हुए
शब्द;
आग की हँसी
ऊर्जा में समाया
मैं तो यहाँ हूँ । ।
रविवार, 20 दिसंबर 2015
पवित्रता की तलाश में
बुधवार, 25 नवंबर 2015
कविता
कहाँ से निकलती है कविता
जितने गहरे से निकलती है कविता
उतने ही गहरे पैठ जाती है कविता
दिल की गहराइयों को छू लेती है कविता
मन की ऊंचाइयों को पा लेती है कविता
शायद अतीत की यादों से निकलती है कविता
या मन के किसी कोने में छुपी टीस से उपजती है कविता
या विषाद , दुःख - दर्द से द्रवित होकर बहती है कविता
यह जो मन में छिपा बैठा है अहंकार
उससे भी दर्पित हुई है कविता
नित नई नई खोजों , कुछ पाने के उछाह में उमंगित हुई है कविता
उछाह , हर्ष , उमंग , टीस , वेदना , ईर्ष्या , द्वेष
सभी में छिपी है कविता
शायद जीवन का रस है कविता
हाँ, जीवन का रस है कविता ।
शनिवार, 7 नवंबर 2015
यह रास्ता
दिल के पार
प्यार की छांव तले
एक खिड़की
हजार दरवाजे ।
दुनिया के गांव में
मोहब्बतों की खेती
जीवन की अर्जी लगाता
आवारा बंजारा जीवन
यह रास्ता कहीं जाता है ???
शनिवार, 31 अक्टूबर 2015
अमृत बूँदें
1
शुरू करो
स्वयं से
मन को पूरी तरह तज
प्रेम में लगा
गोता
गहरा
करो
स्वीकार
स्वयं को ।
2
साक्षी
केवल
मौन
बैठा हुआ
देखता हुआ
जगत को
अमृत बूँदें
चाँदनी में आलोकित ।
शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2015
Comments
Some comments received................ ****************************
Love the emu great painting.
- Tony Swell
Nice example of a modern expression of the middle eastern aesthetic.................
- Gerald Gardener
Nice painting Anupam. I like the design with the foreground and middle ground in the bottom half of the composition and the directional zigzag from bottom right corner to upper left. The muted colors look good and your texture in the upper two thirds is interesting and visually pleasing.
- Kit Kelley
गुरुवार, 8 अक्टूबर 2015
क्यों
इतना मौन
क्यों ?
जवाब दो ।
टुकड़ों टुकड़ों
बँटी हसरतें
क्यों ??
जवाब दो ।।
गौरवशाली इतिहास
सीने से लगाए
जर्जर वर्तमान
क्यों ?
क्यों ??
क्यों ???
जवाब दो ।।।
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खुशियों भरे हुए पल यहाँ बिताने का धन्यवाद । आभार ।।
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Have a look on my latest abstract
" कर जोरि " प्रयाग जी में लेटे हुए श्रीराम भक्त ' श्री हनुमान जी '