गुरुवार, 25 फ़रवरी 2016

ध्रुव गुप्त की कविता की परिभाषा

कविता क्या है, इस बारे में आमतौर पर आप कवियों-शायरों, काव्यशास्त्र के विद्वानों और आलोचकों से ही सुनते आए हैं। विद्वानों की परिभाषाएं किसी को भी समझ में ज्यादा नहीं आतीं। कभी-कभी कुछ पत्रिकाएं आम लोगों से भी पूछ लेती हैं कि कविता के बारे में वे क्या राय रखते हैं। कभी आपने सोचा है कि हमारे बड़े राजनेताओं, धर्मगुरुओं, समाजसेवियों और कलाकारों की कविता के बारे में क्या धारणा है ? तो आज पढ़िए कविता और कवियों के बारे में देश के कुछ बेहद ख़ास लोगों के एक्सक्लूसिव विचार ! अगर आपने इनके अलावा भी किसी के मत का पता है तो कृपया कमेन्ट बॉक्स में जोड़ दें !

नरेन्द्र मोदी - मितरों, कविता क्या होती है, यह मुझसे बेहतर कौन जान सकता है ? मैं बचपन में ही देश का प्रधान कवि बनना चाहता था। भले ही नसीब ने मुझे प्रधान सेवक की कुर्सी पर ला बिठाया हो, लेकिन कविता लिखना मैंने नहीं छोड़ा। पिछले दो सालों में मेरी हिंदी और अंग्रेजी कविताओं के कई संकलन आए हैं, जिनमें प्रमुख हैं - 'अच्छे दिन', 'काला धन', 'स्वाभिमानी भारत', 'मेक इन इंडिया', स्टैंड अप इंडिया' और 'स्टार्ट अप इंडिया'।

राहुल गांधी - एक रात मेरी मां मेरे कमरे मे आई और मुझसे वह कविता सुनाने को कहा जो मैंने 2014 के प्रधानमंत्री पद के अपने शपथ-ग्रहण समारोह के लिए बड़ी मेहनत से लिख रखा था। मेरी कविता सुनकर पहले तो वह आसमान की और ताकती रही और फिर फूट-फूटकर रो पड़ी।

अरविन्द केजरीवाल - कविता जीवन के राजपथ पर आम आदमी की मुहब्बत का अनिश्चितकालीन धरना है।

अन्ना हजारे - कविता भ्रष्टाचारी देह में कैद मन का जनलोकपाल है।

मनमोहन सिंह - कविता के बारे में तो मुझे कुछ ज्यादा पता नहीं, लेकिन अपनी कविता दूसरों को जबर्दस्ती सुनाना कश्मीर में आतंकी घुसपैठ जैसा ही गंभीर अपराध है। सोनिया जी के आदेशानुसार मैं इस दहशतगर्दी की कड़े शब्दों में निंदा करता हूं !

सुषमा स्वराज - विदेश मंत्रालय से बढ़िया फुर्सत से कविता लिखने-सुनने की जगह देश में अभी कहां होगी ? अभी हम एक-एक पाकिस्तानी कविता के जवाब में दस-दस कविताएं सुना रहे हैं।

मोहन भागवत - कविता वस्तुतः ह्रदय की सनातन भावनाओं की 'घर वापसी' है।

योगी आदित्यनाथ - कविता 'लव जेहाद' की अवैध संतान है।

मनोहर लाल खट्टर - अपने हरियाणा में तो जाट भाईयों की लूटपाट और खाप पंचायतों के फैसलों से जितना कुछ बच जाय, बस वही कविता है।

मायावती - अब देखिये न, कवि सम्मेलनों और मुशायरों में भी अब मुलायम के उत्तर प्रदेश जैसी कानून-व्यवस्था है। दिन-दहाडे लोग सड़े अंडे और टमाटर मारकर चले जाते हैं।

मुलायम सिंह यादव - कविता दरअसल यू.पी.ए और एन.डी.ए के दरवाजों पर तीसरे मोर्चे की वह दस्तक है, जिससे सैफई महोत्सव का मायावी तिलिस्म पैदा होता है।

निर्मल बाबा - जिन कवियों की कविताएं नहीं चलतीं, वो श्रोताओं को कविताओं के साथ पनीर के गरम पकौड़े और धनिया की चटनी परोसें। कृपा आनी शुरु हो जायेगी।

बाबा रामदेव - कविता भावनाओं और सपनों का वह कालाधन है जो स्विस बैंक में नहीं, हमारे ह्रदय के किसी अज्ञात कोने नें दबा पड़ा है। शब्दों और शिल्प के अनुलोम-विलोम से ही इसे बाहर निकाला जा सकता है।

अससुद्दीन ओवैसी - शायरी मेरे लिए अबतक बिहार और उत्तरप्रदेश के भदेस व्यंजनों में हैदराबादी बिरयानी की खुशबू घोलने की नाकाम कोशिश रही है। अब देखते है कि चड्ढी- तिलक तथा दाढ़ी- टोपी के तालमेल से शायद कोई कारगर परिभाषा निकल आए !

उमा भारती - कविता मन की मैली गंगा की सफाई का वह विराट अभियान है जो कल्पनाओं में शुरू होता है और कल्पनाओं में ही दम तोड़ देता है।

लालू प्रसाद यादव - कविता भावनाओं का जंगल राज है। बिहार में हमने छुट्टा कवियों के चरने के लिए चरवाहा विद्यालय भी खोला था। ससुरा कौनो कविया एडमिशने लेने नहीं आया।

नीतीश कुमार - कविता भावनाओं का सुशासन है। जब लोग उसके साथ सड़कों पर नहीं, शब्दों में अनाचार करते हैं तो कविता का जन्म होता है।

अनुपम खेर - कविता असहिष्णुता को सहिष्णुता की तरह प्रस्तुत करने की वह राष्ट्रवादी कला है जो आपको पलक झपकते 'पद्मभूषण' बना दे सकती है।

सलमान खान - अब छोड़िए भी सर, मेरे अपने लिए कविता के मतलब की तलाश वैसा ही मुश्किल काम है, जैसा जवानी में बीवी की तलाश। दोनों हाथ में आते-आते फिसल जाती है।

ध्रुव गुप्त
की फेसबुक वाल से साभार

https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=999222546821010&id=100001998223696

मोहन थानवी की कलम से

अपने आस पास की ठंडी हवा से पूछा मैंने
वह
प्राणवायु देने वाले वृक्षों को क्यों छूना चाहती है ?
जवाब में वह मेरे कानों को ऐंठती हुई बोली
क्यों रे आदमी ; जानता नहीं तू ?
वृक्षों से तू ही नहीं मैं भी जीवन पाती हूं
वो मुझे पास पाकर झूमते हैं
और
तुझे देखकर भी गाते हैं
मगर
मैं हमेशा निहत्थी होती हूं
और तेरे पास कभी कभी तीखी कुल्हाड़ी होती है
ऐसा दृश्य देख कर ही मैं सिहर जाती हूं
और
ठंडी होने के बावजूद
अपने प्राणदाता से लिपट लिपट सिसकती-सिसकाती हूं।

- मोहन थानवी
की फेसबुक वाल से साभार

https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=1083706991660635&id=661237997240872

गुलजार

रोज़ आता है ये बहरूपिया,
इक रूप बदल कर,
रात के वक़्त दिखाता है 'कलाएँ' अपनी,
और लुभा लेता है मासूम से लोगों को अदा से!

पूरा हरजाई है, गलियों से गुज़रता है,
कभी छत से,
बजाता हुआ सीटी --
रोज़ आता है, जगाता है,
बहुत लोगों को शब भर!

आज की रात उफ़क से कोई,
चाँद निकले तो गिरफ़्तार ही कर लो!!

-गुलज़ार

स्मृति

आँगन मे जलते हुए काठ के उपर
हाथों को सेंक लिया

बढ़ती ठंड और जमते कोहरे के बावजूद
दरवाज़े को खोल दिया

धीमी बारिश से गीली हुई मिट्टी पे खुद के ही पदचिह्न को देख
यूँ ही मुस्कुरा दिया,

अरसा हो गया था उनसे मिले हुए

उनके इंतेज़ार मे , एक बार फिर,
मुड़ के खुले हुए दरवाज़े को देख लिया ....

- The Curious Wizard



The curious wizard की फेसबुक वाल से साभार

https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=1697148993876058&id=1492080004382959

बुधवार, 24 फ़रवरी 2016

सपने

#हाँ_मै_सपने_देखता_हूँ....

वो जनवरी 2003 की एक सर्द शाम थी...एक किशोर वय बालक अपने पिता के साथ बैठा अलाव ताप रहा था....उत्तर भारत की ठण्ड में अगर आग का सहारा मिल जाय जो ऐसा प्रतीत होता है... कि जैसे भूखे को भोजन और प्यासे को पानी मिल गया हो....!

बातों के दरमियां जब पिता ने पूछा की बोर्ड एग्जाम की तैयारी कैसी चल रही है तब लड़के ने जबाब में कहा ठीक ही है... अभी काफी कुछ रिवाइज करना बाकि है पर फिर भी ये यकीन है कि तैयारी सही चल रही है...!

अच्छी बात है बेटा....खूब मन लगा के तैयारी करो...तुम्हे फेल नही होना है कभी भी....मेरे नाम पर कभी धब्बा न लगने देना....!

यह वह दौर था जब बोर्ड एग्जाम्स में सेल्फ सेंटर का चलन नही था और गांव देहात में बोर्ड एग्जाम पास करने वाले लड़को को काबिल समझा जाता था...!

अरे नही पापा आप टेंशन न लीजिये...मै कभी भी आपको लज्जित नही होने दूंगा....आप तो मेरे लिये दुनिया के सबसे अच्छे पापा है न....लड़के की आवाज में बहुत सारी ख़ुशी झलक रही थी...!

और तुम मेरे लिये दुनिया के सबसे अच्छे बेटे हो....यह कहकर पिता ने पुत्र को गले से लगा लिया...!

यार मै सोच रहा हूँ... की आपकी माँ और आपके लिये यानि हम सबके लिये एक नया घर बनवाया जाय... ताकि जब तुम्हारी शादी हो तो नई बहू को कोई दिक्कत न हो....!

पापा आप भी न अभी मेरी उम्र ही कितनी है...अभी तो मुझे खूब पढ़ना है आगे बढ़ना है और आपका नाम रोशन करना है.... !

फिर भी बेटा मेरा यह सपना है की तुम्हें एक नया घर बना के दूँ.... जहाँ हम सब मिलजुल कर एक साथ राजी ख़ुशी से रह सकें.... वक्त को किसने देखा है.... कौन जाने कब क्या हो जाये....?

उस लड़के के पिता जी ने सच कहा था...वक्त को किसने देखा है.... 30 मई 2003 की उस दुःख भरी सुबह में उस लड़के के पिता जी एक आकस्मिक दुर्घटना का शिकार होकर चल बसें..... लड़के के ऊपर इस घटना का बड़ा भयानक असर पड़ा.... अंदर ही अंदर वह टूट सा गया..बोर्ड एग्जाम भी उसने पास कर लिया था पर उसके पिता जी उसके साथ नही थे....किसी दार्शनिक ने कभी कहा था की इंसान मर जाया करते है पर सपनें कभी नही मरा करते.....यह बात उस किशोर वय लड़के को पता थी.....उसने उसी समय एक निर्णय ले लिया था की आज नही तो कल...इस साल नही तो 5 साल 10 साल बाद जब वह सक्षम हो जायेगा तो अपने पिता के सपनें को जरूर पूरा करेगा....किसी भी हालत में किसी भी सूरत में उसे उन मुरझा चुके सपनों को हकीकत के पानी से सींच कर जिन्दा रखना होगा....!

कई साल बीत गए...कई पतझड़ आये कई बसन्त चले गए....पर वह सपना उस लड़के के मन में हमेशा पलता रहा......और एक दिन उसने सच में उस सपनें को पा लिया.... उन सपनों को हकीकत का अमली जामा पहना कर अपने पिता के अधूरे सपनों को आखिर कार पूरा ही कर दिया.....!

आप जानना चाहोगे वो लड़का कौन है..... रुकिये जरा पोस्ट पढ़ते रहिये....जल्द ही उस लड़के से आपको मिलवाता हूँ....!

पिछले दिनों जब मै फेसबुक से तनिक समय के लिये दूर चला गया था तो मेरे तमाम सुधी मित्रों और चाहने वालों में एक परेशानी सी दौड़ गयी....अरे क्या हुआ हीरा ठाकुर किधर निकल लिये....कुछ ने मेरी वाल पर आकर पूछा कुछ ने इनबॉक्स किया कुछ एक ने तो कॉल भी किया.....मै शुक्रगुजार हूँ उन सभी लोगों का जिन्हें मेरी इतनी फ़िक्र है.... यकीन मानिये मुझे इस बात से बेहद ख़ुशी है की दुनियां में न जाने कितने लोगों के लिये मै एक आम सा भारतीय नागरिक कितना खास हूँ.... यह आप सबका प्यार है जो मजबूती से खड़ा रहने देता है वरना जालिम वक्त की हवाओं ने तो मुझे कब का उड़ा दिया होता....!

हाँ तो मेरे गायब रहने की वजह यही थी कि मै उस किशोर वय लड़के के सपनों को सजा रहा था....उसकी छोटी छोटी आँखों ने कभी जो सपनें देखे थे उनमे हकीकत की खुसबू मिला रहा था....जी रहा था एक एक लम्हे को जिनके लिये उसने बरसों इंतजार किया....और अंतत उसे हासिल कर ही लिया...!

दोस्तों वह लड़का मै ही हूँ.... जिसने अपने पिता के अधूरे सपनों को पूरा करने का एक छोटा सा प्रयास किया है..... पुश्तैनी जायदाद और मकान से इतर खुद के बलबूते पर पिता के ख्बाव को सजाने वाला बेटा मै ही हूँ..... शुरू में तीन बेडरूम हाल किचन की प्लानिंग के साथ शुरू किया गया घर बढ़ते बढ़ते 5 छोटे बड़े कमरे हाल किचन और घर के आगे लान तक आकर रुका....!

लान सहित करीब 2000 इस्क्यार फीट में फैले मेरे मकान यानि मेरे पापा के मकान की जब 4 दिन पहले छत पड़ी तो पल भर के लिये मुझे ऐसा लगा की मैने दुनियां जहाँ की हर ख़ुशी पा ली....मुझे वो सब कुछ मिल गया जो मै नही मेरे पिता जी चाहते थे....जिस दिन छत पड़ी उसके अगले दिन सुबह उसी छत पर नम आँखो के साथ खड़े होकर सुदूर आकाश में सिर्फ एक बार अपने पिता की छवि को देखने की कोशिस कर रहा था....और साथ ही साथ परम् पिता परमेश्वर से यह शिकायत भी कर रहा था की आखिर उन्होंने मेरी ख़ुशी मेरे पापा को मुझसे क्यों छीन लिया...!

आज अगर पापा मेरे साथ होते तो उन्हें मेरे इस काम से कितनी ख़ुशी मिली होती....और उन्हें अपने इस नालायक और शैतान बेटे से शायद कोई भी शिकायत न होती.....पर होनी को कौन टाल सकता है... ईश्वर की मर्जी के सामने किसका जोर चला है...!

सपनों को पूरा करती हुई यह कहानी जितनी अच्छी है उससे कही अधिक प्रयास  अपने पिता के सपनें को पूरा करने के लिये मैने किया है.... एक एक पाई जोड़ के अपने ख़र्चों को बेहद कम करके मैने यह हासिल किया हैं.... मेरे दोस्त जब वीक इंड पर पार्टी के लिये मूवी के लिये जाते थे तब मै कोई न कोई बहाना बना के उन्हें टाल देता था....घर पर ही कोई न कोई मूवी देख लेता था या फिर आप सबके लिये पोस्ट लिख देता था....हर 6 महीने पर जब दोस्त फोन बदल देते थे तो मै अपने दो साल से अधिक पुराने फोन को देख के खुद को समझा लिया करता था....कोई दोस्त जब नई स्पोर्ट बाइक लेकर आता था तो मै अपनी 5 साल पुरानी बाइक को देख असहज हो जाता था पर फिर भी उसे धो पोछ के चमकाने की कोशिश कर लिया करता था...दोस्त जब हॉलीडेज पर हिल स्टेशन जाने का प्लान करते तो मै कोई न कोई आफिस की मजबूरी बता के टाल जाया करता था.....हमेशा स्लीपर क्लास से ही सफर किया....कभी ब्रांडेड कपड़े नही पहने....3 से 5 किलोमीटर पैदल चल जाया करता था....बाइक को महीनों खड़ी करके सिटी बस से सफर किया करता था....जॉब पर भी हरदम कूल रहकर बॉस की झिड़कियां सुनी ताकि आय का एक नियमित स्त्रोत बना रहे....हर वो काम खुसी से किया पूरी लगन से किया जो मेरे पापा के सपनों को पूरा करने में मेरी मदद कर सकें...!

मेरी यह पोस्ट लिखने का मकसद सिर्फ यही है की आज का युवा जो तनिक सी दिक्कत आने पर परेशान हो जाता है...हिम्मत हारने लग जाता है उसे अपने आस पास नजर उठा के देखना चाहिये.....न जाने कितने लोग अपने सपनों को पूरा करने के लिये जी जान से लगे हुए है.... मै भी उनमे से एक हूँ... कई बार थक जाता हूँ.... निराश भी होने लगता हूँ पर हिम्मत कभी भी नही हारता हूँ.... क्योंकि मै सपनें देखता हूँ मन ही मन  उन्हें पूरा होते हुए देखता हूँ और एक दिन वो हकीकत बन कर आ ही जाते है....!

एक मकान को मकान ईट सीमेंट बना देते है पर उसे घर बनाने में किसी का प्यार भी बहुत जरूरी होता है... मै एहसानमन्द हूँ अपने उस खास दोस्त का जिसनें मुझे हरदम सपोर्ट किया....हरदम मेरा ख्याल रखा और हरदम मेरी फ़िक्र की....पब्लिक में कभी कहा नही पर आज सबके सामने कहता हूँ.... आई लव यु माय डियर फ्रेंड....तुम मेरे लिये बेहद खास हो और हरदम रहोगी...!

कल मित्र सत्या कर्ण ने एक बड़ी बढ़िया बात कही की मै सपनें देखता हूँ...उन्ही में जीता हू. यह्ह्ह् मह्ह्ह् ब्रो मै सपनें देखता हूँ और उन्हें पूरा करने की कूवत भी रखता हूँ..!

हाँ मै सपनें देखता हूँ....!

विशाल सिंह   सूर्यवंशम       की फेसबुक वाल से  साभार

https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=1005692659491937&id=100001536381918

सपने

#हाँ_मै_सपने_देखता_हूँ....

वो जनवरी 2003 की एक सर्द शाम थी...एक किशोर वय बालक अपने पिता के साथ बैठा अलाव ताप रहा था....उत्तर भारत की ठण्ड में अगर आग का सहारा मिल जाय जो ऐसा प्रतीत होता है... कि जैसे भूखे को भोजन और प्यासे को पानी मिल गया हो....!

बातों के दरमियां जब पिता ने पूछा की बोर्ड एग्जाम की तैयारी कैसी चल रही है तब लड़के ने जबाब में कहा ठीक ही है... अभी काफी कुछ रिवाइज करना बाकि है पर फिर भी ये यकीन है कि तैयारी सही चल रही है...!

अच्छी बात है बेटा....खूब मन लगा के तैयारी करो...तुम्हे फेल नही होना है कभी भी....मेरे नाम पर कभी धब्बा न लगने देना....!

यह वह दौर था जब बोर्ड एग्जाम्स में सेल्फ सेंटर का चलन नही था और गांव देहात में बोर्ड एग्जाम पास करने वाले लड़को को काबिल समझा जाता था...!

अरे नही पापा आप टेंशन न लीजिये...मै कभी भी आपको लज्जित नही होने दूंगा....आप तो मेरे लिये दुनिया के सबसे अच्छे पापा है न....लड़के की आवाज में बहुत सारी ख़ुशी झलक रही थी...!

और तुम मेरे लिये दुनिया के सबसे अच्छे बेटे हो....यह कहकर पिता ने पुत्र को गले से लगा लिया...!

यार मै सोच रहा हूँ... की आपकी माँ और आपके लिये यानि हम सबके लिये एक नया घर बनवाया जाय... ताकि जब तुम्हारी शादी हो तो नई बहू को कोई दिक्कत न हो....!

पापा आप भी न अभी मेरी उम्र ही कितनी है...अभी तो मुझे खूब पढ़ना है आगे बढ़ना है और आपका नाम रोशन करना है.... !

फिर भी बेटा मेरा यह सपना है की तुम्हें एक नया घर बना के दूँ.... जहाँ हम सब मिलजुल कर एक साथ राजी ख़ुशी से रह सकें.... वक्त को किसने देखा है.... कौन जाने कब क्या हो जाये....?

उस लड़के के पिता जी ने सच कहा था...वक्त को किसने देखा है.... 30 मई 2003 की उस दुःख भरी सुबह में उस लड़के के पिता जी एक आकस्मिक दुर्घटना का शिकार होकर चल बसें..... लड़के के ऊपर इस घटना का बड़ा भयानक असर पड़ा.... अंदर ही अंदर वह टूट सा गया..बोर्ड एग्जाम भी उसने पास कर लिया था पर उसके पिता जी उसके साथ नही थे....किसी दार्शनिक ने कभी कहा था की इंसान मर जाया करते है पर सपनें कभी नही मरा करते.....यह बात उस किशोर वय लड़के को पता थी.....उसने उसी समय एक निर्णय ले लिया था की आज नही तो कल...इस साल नही तो 5 साल 10 साल बाद जब वह सक्षम हो जायेगा तो अपने पिता के सपनें को जरूर पूरा करेगा....किसी भी हालत में किसी भी सूरत में उसे उन मुरझा चुके सपनों को हकीकत के पानी से सींच कर जिन्दा रखना होगा....!

कई साल बीत गए...कई पतझड़ आये कई बसन्त चले गए....पर वह सपना उस लड़के के मन में हमेशा पलता रहा......और एक दिन उसने सच में उस सपनें को पा लिया.... उन सपनों को हकीकत का अमली जामा पहना कर अपने पिता के अधूरे सपनों को आखिर कार पूरा ही कर दिया.....!

आप जानना चाहोगे वो लड़का कौन है..... रुकिये जरा पोस्ट पढ़ते रहिये....जल्द ही उस लड़के से आपको मिलवाता हूँ....!

पिछले दिनों जब मै फेसबुक से तनिक समय के लिये दूर चला गया था तो मेरे तमाम सुधी मित्रों और चाहने वालों में एक परेशानी सी दौड़ गयी....अरे क्या हुआ हीरा ठाकुर किधर निकल लिये....कुछ ने मेरी वाल पर आकर पूछा कुछ ने इनबॉक्स किया कुछ एक ने तो कॉल भी किया.....मै शुक्रगुजार हूँ उन सभी लोगों का जिन्हें मेरी इतनी फ़िक्र है.... यकीन मानिये मुझे इस बात से बेहद ख़ुशी है की दुनियां में न जाने कितने लोगों के लिये मै एक आम सा भारतीय नागरिक कितना खास हूँ.... यह आप सबका प्यार है जो मजबूती से खड़ा रहने देता है वरना जालिम वक्त की हवाओं ने तो मुझे कब का उड़ा दिया होता....!

हाँ तो मेरे गायब रहने की वजह यही थी कि मै उस किशोर वय लड़के के सपनों को सजा रहा था....उसकी छोटी छोटी आँखों ने कभी जो सपनें देखे थे उनमे हकीकत की खुसबू मिला रहा था....जी रहा था एक एक लम्हे को जिनके लिये उसने बरसों इंतजार किया....और अंतत उसे हासिल कर ही लिया...!

दोस्तों वह लड़का मै ही हूँ.... जिसने अपने पिता के अधूरे सपनों को पूरा करने का एक छोटा सा प्रयास किया है..... पुश्तैनी जायदाद और मकान से इतर खुद के बलबूते पर पिता के ख्बाव को सजाने वाला बेटा मै ही हूँ..... शुरू में तीन बेडरूम हाल किचन की प्लानिंग के साथ शुरू किया गया घर बढ़ते बढ़ते 5 छोटे बड़े कमरे हाल किचन और घर के आगे लान तक आकर रुका....!

लान सहित करीब 2000 इस्क्यार फीट में फैले मेरे मकान यानि मेरे पापा के मकान की जब 4 दिन पहले छत पड़ी तो पल भर के लिये मुझे ऐसा लगा की मैने दुनियां जहाँ की हर ख़ुशी पा ली....मुझे वो सब कुछ मिल गया जो मै नही मेरे पिता जी चाहते थे....जिस दिन छत पड़ी उसके अगले दिन सुबह उसी छत पर नम आँखो के साथ खड़े होकर सुदूर आकाश में सिर्फ एक बार अपने पिता की छवि को देखने की कोशिस कर रहा था....और साथ ही साथ परम् पिता परमेश्वर से यह शिकायत भी कर रहा था की आखिर उन्होंने मेरी ख़ुशी मेरे पापा को मुझसे क्यों छीन लिया...!

आज अगर पापा मेरे साथ होते तो उन्हें मेरे इस काम से कितनी ख़ुशी मिली होती....और उन्हें अपने इस नालायक और शैतान बेटे से शायद कोई भी शिकायत न होती.....पर होनी को कौन टाल सकता है... ईश्वर की मर्जी के सामने किसका जोर चला है...!

सपनों को पूरा करती हुई यह कहानी जितनी अच्छी है उससे कही अधिक प्रयास  अपने पिता के सपनें को पूरा करने के लिये मैने किया है.... एक एक पाई जोड़ के अपने ख़र्चों को बेहद कम करके मैने यह हासिल किया हैं.... मेरे दोस्त जब वीक इंड पर पार्टी के लिये मूवी के लिये जाते थे तब मै कोई न कोई बहाना बना के उन्हें टाल देता था....घर पर ही कोई न कोई मूवी देख लेता था या फिर आप सबके लिये पोस्ट लिख देता था....हर 6 महीने पर जब दोस्त फोन बदल देते थे तो मै अपने दो साल से अधिक पुराने फोन को देख के खुद को समझा लिया करता था....कोई दोस्त जब नई स्पोर्ट बाइक लेकर आता था तो मै अपनी 5 साल पुरानी बाइक को देख असहज हो जाता था पर फिर भी उसे धो पोछ के चमकाने की कोशिश कर लिया करता था...दोस्त जब हॉलीडेज पर हिल स्टेशन जाने का प्लान करते तो मै कोई न कोई आफिस की मजबूरी बता के टाल जाया करता था.....हमेशा स्लीपर क्लास से ही सफर किया....कभी ब्रांडेड कपड़े नही पहने....3 से 5 किलोमीटर पैदल चल जाया करता था....बाइक को महीनों खड़ी करके सिटी बस से सफर किया करता था....जॉब पर भी हरदम कूल रहकर बॉस की झिड़कियां सुनी ताकि आय का एक नियमित स्त्रोत बना रहे....हर वो काम खुसी से किया पूरी लगन से किया जो मेरे पापा के सपनों को पूरा करने में मेरी मदद कर सकें...!

मेरी यह पोस्ट लिखने का मकसद सिर्फ यही है की आज का युवा जो तनिक सी दिक्कत आने पर परेशान हो जाता है...हिम्मत हारने लग जाता है उसे अपने आस पास नजर उठा के देखना चाहिये.....न जाने कितने लोग अपने सपनों को पूरा करने के लिये जी जान से लगे हुए है.... मै भी उनमे से एक हूँ... कई बार थक जाता हूँ.... निराश भी होने लगता हूँ पर हिम्मत कभी भी नही हारता हूँ.... क्योंकि मै सपनें देखता हूँ मन ही मन  उन्हें पूरा होते हुए देखता हूँ और एक दिन वो हकीकत बन कर आ ही जाते है....!

एक मकान को मकान ईट सीमेंट बना देते है पर उसे घर बनाने में किसी का प्यार भी बहुत जरूरी होता है... मै एहसानमन्द हूँ अपने उस खास दोस्त का जिसनें मुझे हरदम सपोर्ट किया....हरदम मेरा ख्याल रखा और हरदम मेरी फ़िक्र की....पब्लिक में कभी कहा नही पर आज सबके सामने कहता हूँ.... आई लव यु माय डियर फ्रेंड....तुम मेरे लिये बेहद खास हो और हरदम रहोगी...!

कल मित्र सत्या कर्ण ने एक बड़ी बढ़िया बात कही की मै सपनें देखता हूँ...उन्ही में जीता हू. यह्ह्ह् मह्ह्ह् ब्रो मै सपनें देखता हूँ और उन्हें पूरा करने की कूवत भी रखता हूँ..!

हाँ मै सपनें देखता हूँ....!

विशाल सिंह सूर्यवंशम       की फेसबुक वाल से  साभार


https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=1005692659491937&id=100001536381918

सत्यम् शिवम् सुन्दरम्

कोई भी प्रतीक्षा नहीं
न ही उम्मीद
न कोई चाहत
न ख़्वाहिश
एक बहुत ही गहरा स्पर्श
रूहों को भिगोता हुआ
शांति
आनंद
सत्यम शिवम् सुंदरम

राजेश जोशी की फेसबुक वाल से साभार

https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=944744972240081&id=100001137609210