गुरुवार, 25 फ़रवरी 2016

ध्रुव गुप्त की कविता की परिभाषा

कविता क्या है, इस बारे में आमतौर पर आप कवियों-शायरों, काव्यशास्त्र के विद्वानों और आलोचकों से ही सुनते आए हैं। विद्वानों की परिभाषाएं किसी को भी समझ में ज्यादा नहीं आतीं। कभी-कभी कुछ पत्रिकाएं आम लोगों से भी पूछ लेती हैं कि कविता के बारे में वे क्या राय रखते हैं। कभी आपने सोचा है कि हमारे बड़े राजनेताओं, धर्मगुरुओं, समाजसेवियों और कलाकारों की कविता के बारे में क्या धारणा है ? तो आज पढ़िए कविता और कवियों के बारे में देश के कुछ बेहद ख़ास लोगों के एक्सक्लूसिव विचार ! अगर आपने इनके अलावा भी किसी के मत का पता है तो कृपया कमेन्ट बॉक्स में जोड़ दें !

नरेन्द्र मोदी - मितरों, कविता क्या होती है, यह मुझसे बेहतर कौन जान सकता है ? मैं बचपन में ही देश का प्रधान कवि बनना चाहता था। भले ही नसीब ने मुझे प्रधान सेवक की कुर्सी पर ला बिठाया हो, लेकिन कविता लिखना मैंने नहीं छोड़ा। पिछले दो सालों में मेरी हिंदी और अंग्रेजी कविताओं के कई संकलन आए हैं, जिनमें प्रमुख हैं - 'अच्छे दिन', 'काला धन', 'स्वाभिमानी भारत', 'मेक इन इंडिया', स्टैंड अप इंडिया' और 'स्टार्ट अप इंडिया'।

राहुल गांधी - एक रात मेरी मां मेरे कमरे मे आई और मुझसे वह कविता सुनाने को कहा जो मैंने 2014 के प्रधानमंत्री पद के अपने शपथ-ग्रहण समारोह के लिए बड़ी मेहनत से लिख रखा था। मेरी कविता सुनकर पहले तो वह आसमान की और ताकती रही और फिर फूट-फूटकर रो पड़ी।

अरविन्द केजरीवाल - कविता जीवन के राजपथ पर आम आदमी की मुहब्बत का अनिश्चितकालीन धरना है।

अन्ना हजारे - कविता भ्रष्टाचारी देह में कैद मन का जनलोकपाल है।

मनमोहन सिंह - कविता के बारे में तो मुझे कुछ ज्यादा पता नहीं, लेकिन अपनी कविता दूसरों को जबर्दस्ती सुनाना कश्मीर में आतंकी घुसपैठ जैसा ही गंभीर अपराध है। सोनिया जी के आदेशानुसार मैं इस दहशतगर्दी की कड़े शब्दों में निंदा करता हूं !

सुषमा स्वराज - विदेश मंत्रालय से बढ़िया फुर्सत से कविता लिखने-सुनने की जगह देश में अभी कहां होगी ? अभी हम एक-एक पाकिस्तानी कविता के जवाब में दस-दस कविताएं सुना रहे हैं।

मोहन भागवत - कविता वस्तुतः ह्रदय की सनातन भावनाओं की 'घर वापसी' है।

योगी आदित्यनाथ - कविता 'लव जेहाद' की अवैध संतान है।

मनोहर लाल खट्टर - अपने हरियाणा में तो जाट भाईयों की लूटपाट और खाप पंचायतों के फैसलों से जितना कुछ बच जाय, बस वही कविता है।

मायावती - अब देखिये न, कवि सम्मेलनों और मुशायरों में भी अब मुलायम के उत्तर प्रदेश जैसी कानून-व्यवस्था है। दिन-दहाडे लोग सड़े अंडे और टमाटर मारकर चले जाते हैं।

मुलायम सिंह यादव - कविता दरअसल यू.पी.ए और एन.डी.ए के दरवाजों पर तीसरे मोर्चे की वह दस्तक है, जिससे सैफई महोत्सव का मायावी तिलिस्म पैदा होता है।

निर्मल बाबा - जिन कवियों की कविताएं नहीं चलतीं, वो श्रोताओं को कविताओं के साथ पनीर के गरम पकौड़े और धनिया की चटनी परोसें। कृपा आनी शुरु हो जायेगी।

बाबा रामदेव - कविता भावनाओं और सपनों का वह कालाधन है जो स्विस बैंक में नहीं, हमारे ह्रदय के किसी अज्ञात कोने नें दबा पड़ा है। शब्दों और शिल्प के अनुलोम-विलोम से ही इसे बाहर निकाला जा सकता है।

अससुद्दीन ओवैसी - शायरी मेरे लिए अबतक बिहार और उत्तरप्रदेश के भदेस व्यंजनों में हैदराबादी बिरयानी की खुशबू घोलने की नाकाम कोशिश रही है। अब देखते है कि चड्ढी- तिलक तथा दाढ़ी- टोपी के तालमेल से शायद कोई कारगर परिभाषा निकल आए !

उमा भारती - कविता मन की मैली गंगा की सफाई का वह विराट अभियान है जो कल्पनाओं में शुरू होता है और कल्पनाओं में ही दम तोड़ देता है।

लालू प्रसाद यादव - कविता भावनाओं का जंगल राज है। बिहार में हमने छुट्टा कवियों के चरने के लिए चरवाहा विद्यालय भी खोला था। ससुरा कौनो कविया एडमिशने लेने नहीं आया।

नीतीश कुमार - कविता भावनाओं का सुशासन है। जब लोग उसके साथ सड़कों पर नहीं, शब्दों में अनाचार करते हैं तो कविता का जन्म होता है।

अनुपम खेर - कविता असहिष्णुता को सहिष्णुता की तरह प्रस्तुत करने की वह राष्ट्रवादी कला है जो आपको पलक झपकते 'पद्मभूषण' बना दे सकती है।

सलमान खान - अब छोड़िए भी सर, मेरे अपने लिए कविता के मतलब की तलाश वैसा ही मुश्किल काम है, जैसा जवानी में बीवी की तलाश। दोनों हाथ में आते-आते फिसल जाती है।

ध्रुव गुप्त
की फेसबुक वाल से साभार

https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=999222546821010&id=100001998223696

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें