गीत
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शुक्रिया माँ
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अनकही तेरी सभी मैं जानती हूँ
शुक्रिया माँ आपने साहस दिखाया !
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व्यूह रचना हो रही थी,
मारने जब भ्रूण को
उस समय साँसें हमारी,
छू रही थीं आप को
विकल होकर भी दुलारा था मुझे
बेकली तेरी सभी मैं जानती हूँ
शुक्रिया माँ .................
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उल्झनें तो थी बहुत,
बस ध्यान में,मैं एक थी
दहाड़ती थी पित्र सत्ता,
दुसवारियाँ अनेक थी
निवल होकर भी निभाया धर्म तुमने
बंदगी तेरी सभी मैं जानती हूँ
शुक्रिया माँ ..................
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काले दहकते कोयलों सी
हर घड़ी बातें हुईं
मौन रहकर सह गईं सब
एक भी छूने न दीं
घुटन सहकर भी उतारा धरा पर
दिल्लगी तेरी सभी मैं जानती हूँ
शुक्रिया माँ ...................
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तूने किया सम्मान मेरा
मान के जग वंदनी
शत ऋणी हूँ मैं सदा,
माँ ! बन तुम्हारी नंदनी
अकल से तुमने जताया हक्क अपना
बेबसी तेरी सभी मैं जानती हूँ
शुक्रिया माँ ................. ।
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- कल्पना मनोरमा की फेसबुक वाल से साभार
कल्पना मनोरमा https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=1860156674211014&id=100006500978091
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