शनिवार, 20 फ़रवरी 2016

दिल

दिलको अपने कभी ग़मगीन जो पाया मैंने
तेरी  यादों  के  घरोंदों  को  सजाया मैंने

यूँतो दिल में मेरे अरमान थे कितने लेकिन
ज़िन्दगी  तुझको  बड़ी देर से  पाया  मैंने

जबभी चाहा के तुझे भूलही जाऊं यकसर
ज़र्रे - ज़र्रे  में  तेरा  अक्स ही पाया मैंने

दिल के वीरान कदे में जले यादों के चराग़
आज यूं जशने - ग़मे - यार मनाया मैंने

मेरे जज़्बात, मेरे दिल पे थे भारी हर दम
वही क़िस्से जिन्हें हंस,हंस के सुनाया मैंने

दिल के वो टुकड़े तुम्हें कैसे दिखाऊं 'अंजुम'
बारहा जिनको सलीक़े से सजाया मैंने।।

- अंजुम की फेसबुक वाल  से साभार
https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=939418246141640&id=100002204196089

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