दिलको अपने कभी ग़मगीन जो पाया मैंने
तेरी यादों के घरोंदों को सजाया मैंने
यूँतो दिल में मेरे अरमान थे कितने लेकिन
ज़िन्दगी तुझको बड़ी देर से पाया मैंने
जबभी चाहा के तुझे भूलही जाऊं यकसर
ज़र्रे - ज़र्रे में तेरा अक्स ही पाया मैंने
दिल के वीरान कदे में जले यादों के चराग़
आज यूं जशने - ग़मे - यार मनाया मैंने
मेरे जज़्बात, मेरे दिल पे थे भारी हर दम
वही क़िस्से जिन्हें हंस,हंस के सुनाया मैंने
दिल के वो टुकड़े तुम्हें कैसे दिखाऊं 'अंजुम'
बारहा जिनको सलीक़े से सजाया मैंने।।
- अंजुम की फेसबुक वाल से साभार
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