गुरुवार, 25 फ़रवरी 2016

स्मृति

आँगन मे जलते हुए काठ के उपर
हाथों को सेंक लिया

बढ़ती ठंड और जमते कोहरे के बावजूद
दरवाज़े को खोल दिया

धीमी बारिश से गीली हुई मिट्टी पे खुद के ही पदचिह्न को देख
यूँ ही मुस्कुरा दिया,

अरसा हो गया था उनसे मिले हुए

उनके इंतेज़ार मे , एक बार फिर,
मुड़ के खुले हुए दरवाज़े को देख लिया ....

- The Curious Wizard



The curious wizard की फेसबुक वाल से साभार

https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=1697148993876058&id=1492080004382959

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