गुरुवार, 18 फ़रवरी 2016

बसंत

Savan ke agman per ek kavita likhi thi sochti hun savan ke jane se pehle dal dun....
Lekin savan jata khan he pyar karne vale hirdye me savan hamesha rehta he......

आया वसन्त
खिले दिग दिगन्त
खुशियाँ अनंत
निसी दिन

मादक बयार
चले आर पार
बजे दिल का तार
धिन धिन

सरसों के फूल
ह्रदय के शूल
करवाएं भूल
पल छिन

मन की उमंग
उङे बन पतंग
कितनी तरंग
मत गिन

अमवा पे बौर
कोयल का शोर
कर दे  विभोर
हर दिन

मन है उदास
नहीं तुम हो पास
बुझे कैसे प्यास
तुम बिन...

बुशरा तबस्सुम की फेसबुक वाल से साभार
https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=612825488817039&id=100002687816349

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