रविवार, 21 फ़रवरी 2016

भाड़ में जाओ

ठहरो कि उनका लहू पोछ दो
इनकी तलवारें-बल्लम कुएँ में फेंक आओ
दिल की दिल्ली जलाओ
जलती दिल्ली बुझाओ
गाली या गोली क्या बड़ी बात है ?
ज़रा आओ तो यार !
हमारी गली आओ

मचाना है तो इश्क़ में ऊधम मचाओ
खंज़र उठाओ
जिगर पर चलाओ
हँसाओ, रुलाओ
गले से लगाओ

अबे ओ ! सूखे हुए झाड़
अंतस के आँगन में झाड़ू लगाओ
आँखों की बरसात में भीगो
हरे होने की तमीज़ सीखो
पहाड़ों को मत तुम पहाड़ा सिखाओ
नदी को नदी का न मतलब बताओ
कभी देखा है चाँद-सूरज का झगड़ा ?
ज़रा-सा ज़मीं पर आसमाँ बसाओ

कहाँ है छुपाई कन्हैया ने बंसी
कोई धुन तो छेड़ो कोई गीत गाओ
बनती हो तो ऐसी दुनिया बनाओ
नहीं तो बाबुषा ! भाड़ में जाओ

[ संडे वाले टू मिनट्स नूडल्स यानी कि बाबुषापन्ती. ]
- Baabusha  की फेसबुक वाल से आभार सहित

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