रविवार, 21 फ़रवरी 2016

साँवरिया

अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर मेरी मीठी मिसरी सी मातृभाषा में लडुआ से लाला सौं मन की बात..........,,,,,,,,,,

जीवन बीतौ पैडों करकै ..........,,,
कैसौ सुंदर रूप साँवरे !
लहर लहर मन होय
मेरी तड़पन तेरे दरसन
पाऊँ तौ शीतल होय
करनी तौ कछु करी नाँय
पर कृपा घनेरी चाहूँ
तेरी दया दृष्टि में भीजूं
मन की तपन बुझाऊँ
ऐसी नजर देहु मनमोहन
झाँकी करूँ धन्य हो जाऊँ
जीवन धन की ड्योढ़ी
चढ़ के मंगल रोज़ मनाऊँ
नित उठ दरसन करूँ साँवरे
सुध बुध चरनन में रख आऊँ
कबहुँ न माँगूँ जग के सौ सुख
दरसन सुख में डूब नहाऊँ
तेरी नख शिख की शोभा लखि
पल पल मुग्धमना हो गाऊँ ....
मन ही मन मन की कह आऊँ
मुनक मुनक बतराऊं ....
तुम हो  सखा साँवरे मेरे .....
फिर क्यों मैं दुख पाऊँ  .....
करम करूँ ऐसे जो तुम्हरी
कृपा मनोहर पाऊँ ....
दान करूँ नित उठ ऐसौ प्रभु ...
करूणा से मन को धो आऊँ .....
सबके बीच से चीन्हौ मोहे
मन ऐसौ निरमल कर पाऊँ
तौ तुम टेर बुलाय न लीन्हौ
लगन लगे तौ ऐसी
निसदिन चैन न पावै मनवा
कबहुँ टेर तौ दै साँवरिया
दहकै हिय कौ अवां
प्रभु  तिहारे दरस उपासी
पारण कब कर पाऊँ
सावन में दरसन देवै तौ
देख लहरिया पाऊँ !!
मन की घटा घिरी है मोहन
यादन बिजुरी  कडकै
कबहुँ टेर बुलइयो
जीवन बीतौ पैडौं करकै !!
राज.....

डाॅक्टर राजरानी की फेसबुक वाल से आभार सहित
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