बार बार
एक ही गीत बजता है
कहते जिसे
प्यार
बार बार
एक ही बांसुरी बजती है
कहते जिसे
प्यार
दूरियां बढ़ती जाती
अंततः
प्रेम करना शेष रहता है
और
कुछ क्षणों का प्यार
एक
लंबी
अंतहीन
कविता में ढल जाता है
दूर आसमान में
चांद पर उग आता है
एक शब्द
जिसे तुम कहती हो
प्यार
जिसे मैं भी करता प्यार ।।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें