फैला दूर तक अंतिम काला प्रकाश लगा लिया है मैंने एक टीका चुरा , तुम्हारी आँखों के काजल से अब लगता है डर उजाले से ; है सत्य यही शायद मौन रहना नियति हमारी अस्तित्व को बचाए रखने के लिए ।
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