मंगलवार, 23 फ़रवरी 2016

विचार

आप पूछते हैं
विचारों की आज़ादी क्या है ?

भाईसाहब !
हम मानते हैं
तीन हज़ार सालों की ऐतिहासिक विरासत के सामने
हमारी औक़ात एक मक्खी से ज़्यादा नहीं है
और चूँकि हम मक्खियाँ हैं
सो अपने-अपने राग में भिनभिनाते भी हैं

अब बात यूँ है
कि अपना देश दरअसल कुछ लोगों के गिलास में भरा दूध है
खौलता हुआ
और हर रोज़ ही कोई बेशरम मक्खी भिनभिन करती दूध पर जा पड़ती है

तो ये उन लोगों का कर्त्तव्य है
कि उजले दूध पर पड़ी काली मक्खी निकालें
गिलास में दो चम्मच राष्ट्रभक्ति कम्पनी का बोर्नविटा मिलाएँ
खुद भी पिएँ
औरों को भी पिलाएँ
ताक़त दिखाएँ
जीते हुए को ज़िन्दा जलाएँ
तीन हज़ार सालों का ज़िन्दाबाद मनाएँ

ये उनका  कर्त्तव्य है कि
सड़कों पर ही न उतरें बल्कि माँ-बहन पर भी उतर आएँ
सबसे पहले तो अपनी आँखों का पानी सुखाएँ
दूध का दूध और पानी का पानी करने की सब गुंजाइश मिटाएँ
मैली करें गंगा या जमुना या रावी
हर ओर दूध की गंगा बहाएँ
तोड़ें या फोड़ें काटें या पीटें
चाहें तो अपने ही घर को कमेला बनाएँ
ये कर्त्तव्य है उनका
कि वे अपने बोर्नविटा वाले दूध का क़र्ज़ चुकाएँ

आप पूछते हैं विचारों की आज़ादी क्या है ?
इसे भूलिए थोड़ा और आप समझिए

आप समझिये ये कर्त्तव्य है उनका
कि बैठे-ठाले मारते रहें मक्खियाँ
और अपने गिलास का दूध बचाएँ

[ एंड ब्रूटस इज़ एन ऑनरेबल मैन ]
https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=1028721200521444&id=100001507227650

सोमवार, 22 फ़रवरी 2016

मैं तारे इकट्ठे करती हूं

मैं तारे इकट्ठे करती हूँ

कितनी कोशिश करते हो पीछा छुड़ाने की
फिर भी मैं परछाई सी तुम्हारे संग रहती हूँ
सूरज की धूप में तुम्हारे कदमों का साथ नहीं छोड़ती
और रात को तुम्हारा तकिया बनकर
मैं तारे इकट्ठे करती हूँ

रात में जब तुम उचक कर उठ बैठते हो
तुम्हारी आँख सबसे पहले मुझे ही देखती है
बालकनी में टहलते हुए
टेरस की कुर्सी पर बैठ कर जब तुम चाँद को देखते हो तब संग तुम्हारे
मैं तारे इकट्ठे करती हूँ

कोहरे की चादर ओढे सुनसान गलियों में जब
चौकीदार की सीटी बजती है और
सुनाई देती है बस उसकी चहलकदमी की आवाज़
तुम्हारे दिल की धड़कन भी मैं सुनती हूँ रात भर चांदनी के साए तले
मैं तारे इकट्ठे करती हूँ

मैं तो रूठती नहीं न ही तुम मनाते हो
अपनी ही धुन में रहते हो अजनबी से बनकर
जानते हो तुम मुझको पर मैं तुमको न जान पाई हूँ अबतक
सर्द रातों में ठिठुरती हथेलियों से आंसू पोंछकर
मैं तारे इकट्ठे करती हूँ
-तरसेम

- तरसेम की फेसबुक वाल से साभार

https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=694868050616849&id=100002809826515

बेटी कहे पुकार

गीत
****

शुक्रिया माँ
**********

अनकही तेरी सभी मैं जानती हूँ
शुक्रिया माँ आपने साहस दिखाया !
***

व्यूह रचना हो रही थी,
मारने जब भ्रूण को
उस समय साँसें हमारी,
छू रही थीं आप को
विकल होकर भी दुलारा था मुझे
बेकली तेरी सभी मैं जानती हूँ
शुक्रिया माँ .................
***

उल्झनें तो थी बहुत,
बस ध्यान में,मैं एक थी
दहाड़ती थी पित्र सत्ता,
दुसवारियाँ अनेक थी
निवल होकर भी निभाया धर्म तुमने
बंदगी तेरी सभी मैं जानती हूँ
शुक्रिया माँ ..................
***

काले दहकते कोयलों सी  
हर घड़ी बातें हुईं 
मौन रहकर सह गईं सब
एक भी छूने न दीं
घुटन सहकर भी उतारा धरा पर
दिल्लगी तेरी सभी मैं जानती हूँ
शुक्रिया माँ ...................
***

तूने किया सम्मान मेरा
मान के जग वंदनी
शत ऋणी हूँ मैं सदा,
माँ ! बन तुम्हारी नंदनी
अकल से तुमने जताया हक्क अपना
बेबसी तेरी सभी मैं जानती हूँ
शुक्रिया माँ ................. ।
***

- कल्पना मनोरमा की फेसबुक वाल से साभार

कल्पना मनोरमा https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=1860156674211014&id=100006500978091

डूबते डूबते

आँखें आंसू भरी, पलकेंबोझल घनी
जैसे झीलें भी हों नरम साये भी
वह तो कहिये कि उनको हँसी आ गई
बच गये आज हम डूबते डूबते
https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=10208821333354554&id=1350227529
गौरा गोयल

रविवार, 21 फ़रवरी 2016

साँवरिया

अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर मेरी मीठी मिसरी सी मातृभाषा में लडुआ से लाला सौं मन की बात..........,,,,,,,,,,

जीवन बीतौ पैडों करकै ..........,,,
कैसौ सुंदर रूप साँवरे !
लहर लहर मन होय
मेरी तड़पन तेरे दरसन
पाऊँ तौ शीतल होय
करनी तौ कछु करी नाँय
पर कृपा घनेरी चाहूँ
तेरी दया दृष्टि में भीजूं
मन की तपन बुझाऊँ
ऐसी नजर देहु मनमोहन
झाँकी करूँ धन्य हो जाऊँ
जीवन धन की ड्योढ़ी
चढ़ के मंगल रोज़ मनाऊँ
नित उठ दरसन करूँ साँवरे
सुध बुध चरनन में रख आऊँ
कबहुँ न माँगूँ जग के सौ सुख
दरसन सुख में डूब नहाऊँ
तेरी नख शिख की शोभा लखि
पल पल मुग्धमना हो गाऊँ ....
मन ही मन मन की कह आऊँ
मुनक मुनक बतराऊं ....
तुम हो  सखा साँवरे मेरे .....
फिर क्यों मैं दुख पाऊँ  .....
करम करूँ ऐसे जो तुम्हरी
कृपा मनोहर पाऊँ ....
दान करूँ नित उठ ऐसौ प्रभु ...
करूणा से मन को धो आऊँ .....
सबके बीच से चीन्हौ मोहे
मन ऐसौ निरमल कर पाऊँ
तौ तुम टेर बुलाय न लीन्हौ
लगन लगे तौ ऐसी
निसदिन चैन न पावै मनवा
कबहुँ टेर तौ दै साँवरिया
दहकै हिय कौ अवां
प्रभु  तिहारे दरस उपासी
पारण कब कर पाऊँ
सावन में दरसन देवै तौ
देख लहरिया पाऊँ !!
मन की घटा घिरी है मोहन
यादन बिजुरी  कडकै
कबहुँ टेर बुलइयो
जीवन बीतौ पैडौं करकै !!
राज.....

डाॅक्टर राजरानी की फेसबुक वाल से आभार सहित
://m.facebook.com/story.php?story_fbid=1056125707783766&id=100001590391252

भाड़ में जाओ

ठहरो कि उनका लहू पोछ दो
इनकी तलवारें-बल्लम कुएँ में फेंक आओ
दिल की दिल्ली जलाओ
जलती दिल्ली बुझाओ
गाली या गोली क्या बड़ी बात है ?
ज़रा आओ तो यार !
हमारी गली आओ

मचाना है तो इश्क़ में ऊधम मचाओ
खंज़र उठाओ
जिगर पर चलाओ
हँसाओ, रुलाओ
गले से लगाओ

अबे ओ ! सूखे हुए झाड़
अंतस के आँगन में झाड़ू लगाओ
आँखों की बरसात में भीगो
हरे होने की तमीज़ सीखो
पहाड़ों को मत तुम पहाड़ा सिखाओ
नदी को नदी का न मतलब बताओ
कभी देखा है चाँद-सूरज का झगड़ा ?
ज़रा-सा ज़मीं पर आसमाँ बसाओ

कहाँ है छुपाई कन्हैया ने बंसी
कोई धुन तो छेड़ो कोई गीत गाओ
बनती हो तो ऐसी दुनिया बनाओ
नहीं तो बाबुषा ! भाड़ में जाओ

[ संडे वाले टू मिनट्स नूडल्स यानी कि बाबुषापन्ती. ]
- Baabusha  की फेसबुक वाल से आभार सहित

https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=1027904670603097&id=100001507227650

क्षमा

क्षमा याचना .
........................

एक .
..........

क्षमा मांगने का मतलब
यह नहीं
कि आप गलत हैं
और दूसरा सही .

क्षमा मांगने का मतलब
तो है सिर्फ यही
कि आप
देते हैं तरजीह
एक रिश्ते को
अपने अहम् से कहीं ज्यादा ...!!!

दो .
.........

सिर्फ तितलियाँ
और इंद्रधनुष ही नहीं ,

जीवन में
क्षमा याचना भी
हमें ले जाती है आगे ...!!!

तीन .
...........

अगर लगातार
आप करते हैं समझौते
अपने जीवन में ,
और बार बार
करते हैं क्षमा याचना ,

तो
क्या लगता है आपको ,
कौन बताएगा आपको
आपकी असली क्षमता ...!!!

- आर्य गुड्डू की फेसबुक वाल से आभार सहित https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=555385207944578&id=100004193115077