1
शुरू करो
स्वयं से
मन को पूरी तरह तज
प्रेम में लगा
गोता
गहरा
करो
स्वीकार
स्वयं को ।
2
साक्षी
केवल
मौन
बैठा हुआ
देखता हुआ
जगत को
अमृत बूँदें
चाँदनी में आलोकित ।
1
शुरू करो
स्वयं से
मन को पूरी तरह तज
प्रेम में लगा
गोता
गहरा
करो
स्वीकार
स्वयं को ।
2
साक्षी
केवल
मौन
बैठा हुआ
देखता हुआ
जगत को
अमृत बूँदें
चाँदनी में आलोकित ।
Some comments received................ ****************************
Love the emu great painting.
- Tony Swell
Nice example of a modern expression of the middle eastern aesthetic.................
- Gerald Gardener
Nice painting Anupam. I like the design with the foreground and middle ground in the bottom half of the composition and the directional zigzag from bottom right corner to upper left. The muted colors look good and your texture in the upper two thirds is interesting and visually pleasing.
- Kit Kelley
इतना मौन
क्यों ?
जवाब दो ।
टुकड़ों टुकड़ों
बँटी हसरतें
क्यों ??
जवाब दो ।।
गौरवशाली इतिहास
सीने से लगाए
जर्जर वर्तमान
क्यों ?
क्यों ??
क्यों ???
जवाब दो ।।।
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खुशियों भरे हुए पल यहाँ बिताने का धन्यवाद । आभार ।।
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Have a look on my latest abstract
" कर जोरि " प्रयाग जी में लेटे हुए श्रीराम भक्त ' श्री हनुमान जी '
दुर्लभ अपनत्व
आंखें मलता
जीवन संकल्प
कालचक्र
लिख रहा
नये पृष्ठ
पीछे छूटता
अन्तिम सत्य
ओ यायावर ,
रहे याद
कि
दिशाओं को
भी
खुला आसमान चाहिए ।
अनुपम गुप्त#190920150841
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शब्द बोलते हैं
माटी सुनती है
पुरवा डोलती है
मन सोचता है
धड़कन सुनती है
चूड़ियों की खनक
वक्त कहता है
आज सुनता है
स्वयं को सम्बोधित राग
समय के तराजू में
कुछ छूटी
कुछ याद आईं
कुछ खट्टी
कुछ मीठी
कुछ कच्ची
कुछ पक्की
कुछ कहती
कुछ सुनती
यादें
तुम सब जानती हो
समय सब जानता है ।
An abstract oil painting
-Anupam Gupta
अधर में
खग चहकते
गाती
नदिया धार
प्रतिध्वनित
कितने क्षण
ध्वनियों की
परिधि पार
एक लहर
जन्म लेते ही
देती जन्म
लहरों को
टूटती सीमाएँ
चंचल मन के पार
Thanks for your visit.
And below is an oil painting
by Anupam Gupta
अधर में
खग चहकते
गाती
नदिया धार
प्रतिध्वनित
कितने क्षण
ध्वनियों की
परिधि पार
एक लहर
जन्म लेते ही
देती जन्म
लहरों को
टूटती सीमाएँ
चंचल मन के पार
Thanks for your visit.
And below is an oil painting
by Anupam Gupta